लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद: सदन में हंगामा, निंदा प्रस्ताव बहुमत से पास

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद
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लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद: सदन में हंगामा, सियासत तेज

लखनऊ में मेयर के आवास पर नेमप्लेट पर जूते मारने की घटना के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है। इस पूरे मामले ने नगर निगम से लेकर प्रदेश की राजनीति तक बहस छेड़ दी है। नगर निगम सदन में इस मुद्दे पर निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसके दौरान जमकर हंगामा देखने को मिला।

इस विवाद के केंद्र में लखनऊ की मेयर Sushma Kharkwal और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav के बीच बयानबाजी रही।

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद : सदन में मेयर का बड़ा बयान

नगर निगम सदन में निंदा प्रस्ताव के दौरान मेयर ने कहा कि उनके आवास पर हुई घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सदन में भावुक होते हुए कहा कि जिन लोगों ने उनके आवास पर तोड़फोड़ की, वे उसी पार्टी से जुड़े हैं जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं।

उन्होंने सवाल करते हुए कहा:

“मैं अपने भाई अखिलेश यादव से पूछना चाहती हूं कि क्या पार्टी के लोगों द्वारा आपकी बहन को जूता मारना सही है?”

इस बयान के बाद सदन में माहौल और गरमा गया।

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद : भाजपा पार्षदों की तीखी प्रतिक्रिया

सदन के दौरान भाजपा पार्षद रामनरेश रावत ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मेयर कार्यालय पर अभद्रता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बयान के दौरान सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद : निंदा प्रस्ताव बहुमत से पास

महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर मेयर द्वारा बुलाए गए विशेष सदन में भारी हंगामा हुआ। इसके बावजूद:

  • कुल पार्षद: 119
  • बहुमत: 83 पार्षद
  • निर्वाचित पार्षद: 10

भाजपा पार्षदों के समर्थन से निंदा प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया गया।

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद : नेमप्लेट पर जूते मारने की घटना

पूरा विवाद उस घटना से शुरू हुआ जब सपा नेता गौरव चौधरी अपने साथियों के साथ मेयर आवास पहुंचे। आरोप है कि:

  • नेमप्लेट पर चप्पल से प्रहार किया गया
  • नेमप्लेट पर कालिख पोती गई
  • सुरक्षा बैरियर हिलाए गए
  • नारेबाजी की गई

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया।

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद : बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक तनाव

इस घटना से पहले महिला आरक्षण को लेकर आयोजित जनाक्रोश रैली में दिए गए बयान के बाद विवाद शुरू हुआ था। उसी बयान के बाद से भाजपा और सपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई।

मेयर ने आरोप लगाया कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को बढ़ा रहा है।

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद : सदन में विपक्ष का हंगामा

नगर निगम सदन शुरू होते ही सपा और कांग्रेस पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि:

  • महिला आरक्षण का मुद्दा नगर निगम का विषय नहीं
  • शहर के विकास कार्य प्राथमिकता होनी चाहिए

स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को बुलाना पड़ा। हजरतगंज कोतवाली से पुलिस बल मौके पर पहुंचा।

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद : नगर निगम बनाम राष्ट्रीय राजनीति की बहस

इस पूरे विवाद ने एक नई बहस को जन्म दिया है कि:

  • क्या नगर निगम में राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए?
  • क्या स्थानीय विकास मुद्दे पीछे छूट रहे हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में और गहरा सकता है।

निष्कर्ष

लखनऊ मेयर नेमप्लेट विवाद अब केवल एक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह नगर निगम की राजनीति से निकलकर प्रदेश स्तर की सियासत का बड़ा मुद्दा बन चुका है। सदन में हंगामा, निंदा प्रस्ताव और बयानबाजी ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।

आने वाले दिनों में इस विवाद के राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।