बैटरी कार लगेज दर विरोध: लखनऊ में कुलियों का बड़ा प्रदर्शन
बैटरी कार लगेज दर विरोध अब प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। राजधानी लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को सैकड़ों कुलियों ने बैटरी कार से लगेज ढुलाई की बढ़ती व्यवस्था और दरों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुलियों ने सरकार और रेलवे प्रशासन से अपनी मांगों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की।
यह प्रदर्शन केवल स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि हजारों कुलियों की आजीविका से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। कुलियों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो उनका रोजगार पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर पहुंच सकता है।
प्रदर्शन का नेतृत्व और कुलियों की चेतावनी
प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय कुली मोर्चा के नेशनल कोऑर्डिनेटर राम सुरेश यादव ने किया। उन्होंने कहा कि बैटरी कार सेवा शुरू होने के बाद से पारंपरिक कुलियों की रोजी-रोटी पर गंभीर असर पड़ा है।
उनके अनुसार रेलवे स्टेशनों पर लगेज ढुलाई का बड़ा हिस्सा अब बैटरी कारों को दिया जा रहा है, जिससे हजारों कुलियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जल्द नीति नहीं बनाई तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर तेज किया जाएगा।
कुलियों की मुख्य मांगें
बैटरी कार लगेज दर विरोध के दौरान कुलियों ने कई अहम मांगें रखीं:
- बैटरी कार लगेज दरों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए
- स्टेशन परिसर में कुलियों के कार्यक्षेत्र को सुरक्षित किया जाए
- कुलियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू की जाएं
- रोजगार सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाई जाए
कुलियों का कहना है कि वे तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन रोजगार खत्म करके तकनीक लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
रोजी-रोटी पर बढ़ता संकट
प्रदर्शन में शामिल कुलियों ने बताया कि पहले यात्रियों का अधिकांश सामान वे खुद ढोते थे, जिससे उन्हें नियमित आय मिलती थी। लेकिन अब स्टेशन परिसर में बैटरी कारों के बढ़ते उपयोग से उनकी आय में भारी गिरावट आई है।
कई कुलियों ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए बताया:
- पहले दिनभर में कई चक्कर मिल जाते थे, अब काम बहुत कम रह गया है
- परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है
- बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है
- कई कुली कर्ज लेने को मजबूर हो गए हैं
यह स्थिति केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई बड़े रेलवे स्टेशनों पर यही समस्या सामने आ रही है।
रेलवे और सरकार से समाधान की उम्मीद
कुलियों ने कहा कि रेलवे प्रशासन को बैटरी कार सेवा लागू करने से पहले पारंपरिक कुलियों के भविष्य पर विचार करना चाहिए था। उनका मानना है कि यदि सही नीति बनाई जाए तो बैटरी कार और कुली दोनों साथ-साथ काम कर सकते हैं।
कुलियों की मांग है कि रेलवे एक संतुलित मॉडल बनाए जिसमें:
- बैटरी कार सेवा सीमित दायरे में हो
- कुलियों के काम की गारंटी दी जाए
- रोजगार और तकनीक के बीच संतुलन बनाया जाए
24 अप्रैल को दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन
बैटरी कार लगेज दर विरोध को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए 24 अप्रैल को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में देशभर से कुली प्रतिनिधि शामिल होंगे।
सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधिमंडल रेल मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात करेगा और अपनी मांगों को विस्तार से रखेगा। कुलियों का कहना है कि यह सम्मेलन उनके भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
यदि इस बैठक में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है।
देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कुलियों ने साफ कहा है कि यह केवल शुरुआत है। यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को पूरे देश में फैलाया जाएगा।
उनका कहना है कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी दांव पर लगी है और अब वे अपने अधिकारों के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएंगे।
निष्कर्ष
बैटरी कार लगेज दर विरोध अब एक बड़े श्रमिक आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। लखनऊ से शुरू हुआ यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है।
अब सभी की नजरें 24 अप्रैल को होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन और सरकार-रेलवे के फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा देशभर के रेलवे स्टेशनों पर बड़ा आंदोलन बन सकता है।


